100 साल से भी पुराना है इलेक्ट्रिक कारों का इतिहास

भारत में इलेक्ट्रिक कारों का इतिहास काफी पुराना है। इलेक्ट्रिक कारों कहानी 1990 के दशक से शुरू हुई थी जब कुछ कंपनियों ने इलेक्ट्रिक वाहनों का विकास और निर्माण करना शुरू किया था। 1993 में उत्तम नाम की कंपनी ने भारत की पहली इलेक्ट्रिक कार लॉन्च की। इसके बाद 30 साल से ज्यादा समय में ईवी सेगमेंट में कई देशी कंपनियों ने अपने अलग.अलग प्रोडक्ट पेश किए  अब सबसे सस्ती एमजी कॉमेट ईवी से लेकर रोल्स रॉयस स्पेक्टर जैसी प्रीमियम ईवी भी भारत में बिक रही हैं। इन सबके बीच टाटा मोटर्स भारत में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें बेचती हैं जिनमें नेक्सॉन, महिन्द्रा , बीएमडब्लू आदि  टॉप सेलिंग इलेक्ट्रिक कारों है ।

इलेक्ट्रिक कारों का इतिहास

भारत की पहली इलेक्ट्रिक कार

उत्तम कंपनी की लवबर्ड भारत की पहली इलेक्ट्रिक कार लॉन्च थी । एक दो सीटों वाली कार थी जो एक बार फुल चार्ज होने पर 60 किलोमीटर तक चलती थी। इसके बाद साल 2001 में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने रेवा नाम से एक इलेक्ट्रिक कार लॉन्च की। यह लवबर्ड की तुलना में ज्यादा पॉपुलर हुई और भारत में इलेक्ट्रिक कारों को लोकप्रिय बनाने में इसने अहम भूमिका निभाई।

साल 2000 के दशक के शुरुआती वर्षों में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री धीमी रही। उच्च लागत, सीमित रेंज और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी जैसी चुनौतियों का इन्हें सामना करना पड़ा।सरकारी प्रोत्साहन और तकनीकी विकास के कारण 2010 के दशक में लोगों को इलेक्ट्रिक कारों में धीरे-धीरे रुचि बढ़ी। आज भारत में कई कंपनियां इलेक्ट्रिक कारों का निर्माण और बिक्री करती हैं जिनमें टाटा मोटर्सए ,महिंद्रा एंड महिंद्रा ,हुंडई, एमजीए, किआ, बीवाईडी समेत और भी कंपनियां हैं। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां लागू कर रही हैं। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें भी घट रही हैं और अच्छी रेंज वाली इलेक्ट्रिक कारों  की वजह से उपभोक्ताओं को आकर्षित कर रही हैं।

भारत में इलेक्ट्रिक कारों की यात्रा

जहां आज सभी वाहन कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ रूख कर रही हैं बता दे  आज से करीब 100 साल पहले ही अमेरिका में एक तिहाई इलेक्ट्रिक गाड़ियां हुआ करती थी। वहीं एक अंग्रेजी वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक आप से करीब 20 साल बाद यानी 2040 में फिर से वह दौर आएगा। जब आधे से ज्यादा कारें इलेक्ट्रिक होंगी। 1900 के दौर में मौजूद गाड़ियों के विलुत्प होने के पीछे वजह उस समय के गैसोलिन मॉडल्स थे। 

देखें कैसे बदला 200 सालों में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इतिहास

आइए डालते हैं एक नजर लुप्त हो चुकी कारों के इतिहास पर । 

इस समय में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर कई प्रयोग किए गए। रॉबर्ट ऐंडरसन को 1832 में ब्रिटेन की पहली इलेक्ट्रिक गाड़ी बनाने का श्रेय जाता है। साल 1899 में बेल्जियाई के रेस कार ड्राइवर केमिले जेनट्ज़ी ने खुद की बनाई एक इलेक्ट्रिक कार को 100 किमी प्रतिघंटा से ज्यादा की स्पीड पर दौड़ाया था। वहीं 13 सितंबर 1899 में सबसे पहले इलेक्ट्रिक टैक्सी बनाई गई थी। 

भविष्य 

एक अंग्रेजी वेबसाइट की खबर के मुताबिक साल 2025 में 250  से ज्यादा वाहन बैटरियों से चलने वाले होंगे।जिसमें ऑडी की म.जतवद और जगुआर की प्.च्ंबम जैसी एसयूवी शामिल हैं। वहीं 2025  तक यूएस इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 1 मिलियन का आंकड़ा भी पार कर लेगी।

इलेक्ट्रिक कारों के रास्ते की चुनौतियां

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी अपर्याप्त हैए खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में।

इलेक्ट्रिक कारों की शुरुआती लागत अभी भी पेट्रोल और डीजल कारों की तुलना में ज्यादा है।

बैटरी रीसाइक्लिंग एक चिंता का विषय है।

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